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बड़ी मुश्किल से किसानों का कूच रुका, 7 दिनों का अल्टीमेटम

बड़ी मुश्किल से किसानों का कूच रुका, 7 दिनों का अल्टीमेटम

नयी दिल्ली : नोएडा की सड़कों पर दिनभर हंगामा बरपता रहा। किसान दिल्ली कूच कर रहे थे और उनकी तादाद हजारों में थी। लेकिन शाम होते-होते एक आंशिक कामयाबी मिली और प्रशासन के अधिकारी किसान नेताओं को सड़क से हटने के लिए मनाने में कामयाब रहे। उससे पहले किसानों का जत्था लगभग दो किलोमीटर पैदल मार्च कर चुका था। इस दौरान दिल्ली और ग्रेटर नोएडा के बीच एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक पूरी तरह बंद पड़ा हुआ था।

किसानों की बातचीत 1 दिसंबर को अथॉरिटी के साथ विफल हुई, तो उन्होंने ऐलान किया कि 2 दिसंबर को वे अपनी बात केंद्र सरकार को सुनाने के लिए दिल्ली कूच करेंगे। ठीक 12 बजे किसानों का जमावड़ा दिल्ली बॉर्डर से लगभग चार किलोमीटर दूर महामाया फ्लाईओवर के पास लगना शुरू हो गया। देखते-देखते हजारों किसान इकट्ठे हो गए, जिनमें बड़ी तादाद में महिलाएं भी थीं। थोड़ी देर आपस में विचार-विमर्श करने के बाद सारे किसान दिल्ली की तरफ आगे बढ़ने लगे।

देखते-देखते उन्होंने पुलिस बैरिकेड तोड़ डाले और दलित प्रेरणा स्थल पहुंच गए। सभी के हाथों में अलग-अलग यूनियन के झंडे थे और सिर पर टोपी। दलित प्रेरणा स्थल पर लगभग डेढ़ बजे किसानों ने धरना देना शुरू किया और कहा कि सरकार बात सुनने को राजी नहीं हो रही है। किसानों की समस्या नोएडा और आसपास की जुड़ी तीनों अथॉरिटी से थी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी के आला अधिकारी किसानों से बातचीत करने दलित प्रेरणा स्थल के सामने वाली सड़क पर बैठ गए।

बातचीत खास तौर पर दो मुद्दों पर थी। पहला मुद्दा था कि जो जमीन किसानों से अधिग्रहित की गई है, उसका 10% डेवलप एरिया किसानों को दिया जाए और दूसरा यह कि जो भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में पास किया गया था, उसे नोएडा और आसपास के इलाकों में भी लागू किया जाए ताकि किसानों को ज्यादा मुआवजा मिले। जो अधिकारी बातचीत करने आए थे, वे इतने सीनियर नहीं थे कि इन दोनों मुद्दों पर किसानों को कोई लिखित आश्वासन दे पाते। इसलिए यह वादा किया गया की मुख्य सचिव स्तर की वार्ता इसी हफ्ते होगी और तब तक किसान सड़क से हटकर दलित प्रेरणा स्थल के अंदर अपना धरना जारी रखेंगे।

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